Posts

संविधान सभा उस समय की राजनीतिक परिस्थिति और एक मजबूत केन्द्र सरकार

  प्रश्न : संविधान सभा के कुछ सदस्यों ने उस समय की राजनीतिक परिस्थिति और एक मजबूत केन्द्र   सरकार की जरूरत के बीच क्‍या संबंध देखा ? उत्तर : संविधान सभा में इस बात पर काफी बहस हुई कि केन्द्र और राज्य सरकारों के बिच अधिकारों का बाँटवारा किस प्रकार किया जाय ? जो लोग शक्तिशाली केद्र के पक्ष में थे उनमे जवाहरलाल नेहरू भी थे। ( 1 ) डा.अम्बेडकर 935 के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित केन्द्र से भी ज्यादा शक्तिशाली केन्द्र चाहते थे। ( 2 ) कुछ सदस्य साम्प्रदायिक दंगों को रोकने के लिए केन्द्र की शक्ति को बढ़ाना चाहते थे। ( 3 ) एक सदस्य के अनुसार केन्द्र का शक्तिशाली होना जरूरी है। ताकि वह देश के हित में योजना बना सके , उपलब्ध आर्थिक संसाधनों को जुटा सके एक उचित शासन व्यवस्था की स्थापना - कर सके और देश को विदेशी आक्रमण से बचा सके।

भारतीय संविधान सभा ने भाषा विवाद

  प्रश्न : भारतीय संविधान सभा ने भाषा विवाद को कैसे हल किया ? अथवा , संविधान सभा ने भाषा विवाद को हल करने के लिए क्या रास्ता निकाला ? उत्तर : i ) संविधान सभा के शुरुआती सत्र में संयुक्त प्रान्त के कांग्रेसी सदस्य आ. वी. धुलेकर ने जोरदार शब्दों में कहा कि हिन्दी संविधान निर्माण की भाषा होनी चाहिए। |   ii ) लेकिन जब कहा गया कि सभा के सभी सदस्य हिन्दी नहीं समझते हैं तो धुलेकर ने यह कहकर “ सनसनी फैला दी कि जो सदस्य हिन्दी नहीं समझते उन्हें सदस्यता का परित्याग कर चले जाना चाहिए। iii ) घुलेकर की इस टिप्पणी के कारण सभा में हंगामा होता रहा और वे हिन्दी में अपना भाषण देते रहे। iv ) बाद में नेहरू के हस्तक्षेप से सदन में शान्ति स्थापित हुई। लेंकिन भाषा का सवाल अगले तीन साल तक बार - बार सदन की कार्रवाइयों में बाधा डालता रहा और सदस्यों को उत्तेजित करता रहा। भाषा विवाद का समाधान : (i) संविधान सभा की भाषा समिति ने राष्ट्रीय भाषा के प्रश्न पर एक फार्मूला विकसित कर लिया था। ( ii ) समिति ने सुझाव दिया कि देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी भारत की राजकीय भाषा होगी। (iii) स...

उद्देश्य प्रस्ताव'

  प्रएन : ह० जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव क्‍यों कहा जाता है उल्लेख करें। अथवा , उद्देश्य प्रस्ताव ' के लक्ष्य क्या थे ? अथवा , नेहरू द्वारा पेश किये गये ' उद्देश्य प्रस्ताव ' में व्यक्त उन आदर्शों की व्याख्या कीजिए जिनको भारत के संविधान निर्माण के समय ध्यान में रखा जाना था। उत्तर : 1 3 दिसंबर 1 946 ई. को जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने “ उद्देश्य प्रस्ताव ' प्रस्तुत किया। इसमें संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की गयी थी जो इस प्रकार है-- ( i ) इसमें भारत को एक ' स्वतंत्र सम्प्रभु गणराज्य ' घोषित किया गया था। ii) नागरिकों को न्याय , समानता एवं स्वतंत्रता का आश्वासन दिया गया था। iii ) यह वचन दिया गया था कि अल्पसंख्यकों , दलितों , आदिवासियों एवं पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त रक्षात्मक प्रावधान किये जायेंगे। iv ) नेहरू ने अपने भाषण में भारतीय संघर्ष की तुलना अमेरिका और फ्रांस की क्रांति से की। v ) नेहरू ने किसी विशेष प्रकार के लोकतंत्र को अपनाने का विरोध किया। vi ) उनके अनुसार पश्चिम की आँ...

भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों

  प्रश्न: भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालें। अथवा , भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालें। अथवा , भारतीय संविधान की की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें। उत्तर : संविधान के प्रस्तावना में भारत को “ संप्रभुत्व , समाजवादी , धर्मनिरपेक्ष , प्रजातांञ्रिक - गणतंत्र ” घोषित किया गया। तदनुरूप संविधान में संसदीय कार्यप्रणाली , व्यस्क मताधिकार , जनमत , प्रेस की स्वतंत्रता आदि जैसे विषयों को संविधान में शामिल किया गया। भारतीय संविधान की प्रस्तावना के आधार पर संविधान के मूल सिद्धान्त निम्नलिखित हैं - 1 ) प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र : भारत की संप्रभुता उसकी जनता में निहित है। प्रभुत्वसंपन्‍न देश होने का अर्थ यह है कि भारत अपनी आंतरिक और बाह्य नीतियों के निर्धारण में स्वतंत्र है। भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी इच्छानुसार व्यवहार करने के लिए स्वतंत्र है।   2. समाजवादी : शासन का उद्देश्य सामाजिक , आर्थिक तथा राजनीतिक उत्पीड़नों से मुक्ति दिलाना है। 3. ) धर्मनिरपेक्ष : मूल संविधान में भारत को धर्मनिरपेक्ष नहीं बताया गया था...

1946 से पूर्व के सांविधानिक प्रयास संविधान सभा के प्रयासों

  प्रश्न: स्पष्ट कीजिए कि 1 946 से पूर्व के सांविधानिक प्रयास संविधान सभा के प्रयासों से किस रूप में भिन्‍न थे। अथवा , वे कौन सी ऐतिहासिक ताकतें थीं जिन्होंने संविधान का स्वरूप तय किया ? उत्तर : 1 946 ई. से पूर्व सांविधानिक प्रयासों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं - i.                     1909 ई. के सुधारों के अंतर्गत सांप्रदायिक चुनाव प्रणाली प्रारंभ की गयी जिसके अंतर्गत | मुसलमान विशेष चुनाव क्षेत्रों से अपने प्रतिनिधि चुनते थे। ii ) देश में सैद्धांतिक रूप से 935 ई. के कानून के अंतर्गत उत्तरदायी रकार की स्थापना की गयी. परंतु व्यवहार में गवर्नर जेनरल को अधिक शक्तिशाली बनाया गया। iii ) मत देने का अधिकार सीमित था। 1 935 ई. में यह केवल 1 0-15 प्रतिशत था। इस प्रकार 1946 ई. के पूर्व के सांविधानिक प्रयोग एक प्रतिनिध्यात्मक सरकार की स्थापना के लिए लगातार की जा रही माँग के उत्तर में थे। जो भी कानून ( 1 909-1919 ई. और 1 935 ई.) पास किये गये उनमें भारतीयों की भागीदारी नहीं थ...

भारत के संविधान के निर्माण में डॉ. भीमराव. अम्बेदकर की भूमिका

  प्रश्न: भारत के संविधान के निर्माण में डॉ. भीमराव. अम्बेदकर की भूमिका का वर्णन कीजिए। अथवा , संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. अम्बेडकर की भूमिका का वर्णन करें उत्तर : ( i ) प्रख्यात विधिवेत्ता और अर्थशाज्री बी. आर. अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में संविधान सभा के सबसे महत्त्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे। (ii) यद्यपि ब्रिटिश शासन के काल में अम्बेडकर कांग्रेस के राजनीतिक विरोधी रहे थे परन्तु विभाजन की हिंसा के पश्चात्‌ डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने दलितों (हरिजनों) के .लिए पृथक निर्वाचिका की अपनी माँग छोड़ दी थी। iii) स्वतंत्रता के समय गाँधीजी की सलाह पर डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को केन्द्रीय विधि मंत्री का पद दिया गया। इस भूमिका में उन्होंने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया। न्‍ हक iv ) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के अथक प्रयास से इस समिति ने अपनी संस्तुतियाँ 2 1 फरवरी , 1948 ई. को संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत की। इन प्रस्तावों को विचार-विमर्श के पश्चात्‌ 26 नवम्बर , 1949 ई. को संविधान सभा ने पारित कर दिया। v ) संविधान ...

संविधान सभा के समक्ष बहस के प्रमुख विषयों

  प्रश्न : भारतीय संविधान के निर्माण में उठे किन्हीं चार महत्त्वपूर्ण मुद्दों को समझाएँ। अथवा , संविधान सभा के समक्ष बहस के प्रमुख विषयों पर एक आलोचनात्मक पसीक्षण करें। अथवा , संविधान निर्माताओं के सामने प्रमुख समस्याओं के बारे में बतायें। उत्तर ; संविधान का निर्माण करते समय निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार कर उनका समाधान किया गया - पृथक निर्वाचिका की समस्या : संविधान सभा में पृथक निर्वाचिका के प्रश्न पर मतभेद थे | 27 अगस्त 1 947 को मद्रास के बी. पोकर बहादुर ने पृथक निर्वाचिका के पक्ष में अल्पसंख्यकों को राजनीतिक व्यवस्था में पूर्ण प्रतिनिधित्व देने की माँग की। परन्तु सरदार पटेल जैसे राष्ट्रवादी नेता इसके विरुद्ध थे। गोविन्द वल्‍लभ पंत के अनुसार पृथक निर्वाचिका राष्ट्र और अल्पसंख्यक वर्गों दोनों के लिए हानिकारक है। विभाजन के सम्रय हिंसा को देखते हुए डॉ. अम्बेडकर ने पृथक निर्बाचिका को माँग त्याग दी थी। अंत में संविधान सभा ने अस्पृश्यता का अंत , हिन्दू मन्दिरों को सबके लिए खोलना निचली जातियों के लिए विधायिकाओं और सरकारी नौकरी में आरक्षण के सुझाव दिए। ...